Hyderabad Liberation Day: Merger of 562 Princely States after Independence & Sardar Patel's Contribution - News 360 Tv

Hyderabad Liberation Day: Merger of 562 Princely States after Independence & Sardar Patel's Contribution



                                                 ( सरदार पटेल के आगे नतमस्तक होते हैदराबाद के निज़ाम )

17 सितम्बर 1948,  ये वो तारीख है, जो इतिहास के सुनहरे पन्नों में दर्ज है, इसी दिन ऑपरेशन पोलो के जरिए हैदराबाद रिसासत का भारत में विलय हुआ. हैदराबाद अकेली ऐसी रियासत नहीं थी, जूनागढ़ और जम्मू एवं कश्मीर समेत 562 रियासतें  थी, जिनके विलय के बिना आज़ाद देश की कल्पना बेमानी थी,
 इन 562  देसी रियासतों का क्षेत्रफल भारत का 40 प्रतिशत था। स्वतंत्रता के बाद जब भारतीय संघ का गठन हो रहा था, तब जम्मू एवं कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़ ने संघ में शामिल होने से इंकार कर दिया था. तब इन रियासतों के विलय (Merger of 562 Princely States) का जिम्मा सौंपा गया था सरदार वल्लभ भाई पटेल को. उप-प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के रूप में सरदार पटेल (Sardar Patel) की पहली प्राथमिकता बिना कोई खून बहाये देसी रियासतों को भारत में मिलाना था।
पटेल ने देसी राजाओं को बहुत समझाया कि उन्हे स्वायत्तता देना सम्भव नहीं होगा। तब तीन को छोडकर शेष सभी रियासतों ने विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। 1948 में राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में सरदार पटेल ने विलय के प्रस्ताव को मानने वाले राजाओं का शुक्रिया कुछ इस तरह व्यक्त किया .. 


हैदराबाद भारत की सबसे बड़ी रियासत थी, जो चारों ओर से भारतीय भूमि से घिरी थी। वहां के निजाम ने पाकिस्तान के कहने पर स्वतंत्र राज्य का दावा किया और अपनी सेना बढ़ानी और हथियार आयात करने शुरू कर दिए. तब पटेल चिंतित हो उठे और उन्होंने भारतीय सेना का ऑपरेशन पोलो चलाने का फैसला लिया, तब भारतीय सेना 13 सितंबर 1948 को हैदराबाद में प्रवेश कर गयी। तीन दिनों के बाद निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया और नवंबर 1948 में भारत में विलय का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।
भले ही कोई भारत के बीच में हो, मगर जिसकी निष्ठा देश की सीमाओं के बाहर हो. वो कभी भी दगा दे सकता है. सरदार पटेल का भी शुरू से ही यही मानना था कि प्रस्ताव ना मानने वाली रियासतें आगे चलकर भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा ख़तरा हो सकती है.
  • सरदार पटेल ने राजाओं को ख़त्म किए बिना ख़त्म कर दी थीं रियासतें 
  • सरदार पटेल ने 562 रियासतों को भारत में मिलाकर एक सूत्र में बांधा

  • रियासतों के विलय के कारण ही वल्लभ भाई पटेल को लौहपुरुष के नाम से जाना गया

  • 1947 में स्वतंत्र होने के बाद भारत स्वतंत्र रियासतों में बंटा हुआ था 

  • स्वतंत्रता के बाद रियासतों के विलय के लिए भारतीय संघ का गठन किया गया 

  •  जम्मू एवं कश्मीर, हैदराबाद, जूनागढ़ ने संघ में शामिल होने से इंकार किया था

  • 17 सितंबर 1948 को सेना की मदद से हैदराबाद रिसासत का भारत में विलय किया 

  • सेना भेजने पर सरदार पटेल और पंडित नेहरू में मतभेद थे 

  • भारतीय सेना की इस कार्रवाई को 'ऑपरेशन पोलो' का नाम दिया गया 

  • हैदराबाद में दुनिया के सबसे ज्यादा पोलो के 17 मैदान होने की वजह से ऑपरेशन पोलो नाम दिया

  • 108 घंटों तक चली इस कार्रवाई में 1,373 रज़ाकार मारे गए.

  •  हैदराबाद स्टेट के 807 जवानों की भी मौत हुई. 

  • भारतीय सेना ने अपने 66 जवान खोए जबकि 97 जवान घायल हुए. 

  • चार दिन तक चले सेना के ऑपरेशन के बाद निज़ाम की सेना ने आत्मसमर्पण कर दिया 

  • हैदराबाद के निज़ाम मीर उस्मान अली ने 37 वर्षों तक शासन किया था 

  • हैदराबाद की खान से निकला कोहिनूर हीरा दुनियाभर में मशहूर है  

  • निज़ाम के पास दुनिया का सबसे बड़ा 185 कैरेट का जैकब हीरा था

  •  जैकब हीरे को निज़ाम पेपर वेट की तरह इस्तेमाल करते थे 

  • टाइम पत्रिका ने 1937 में निजाम को दुनिया का सबसे अमीर शख़्स घोषित किया था 

  • भारतीय प्रशासनिक सेवक वी.पी. मेनन ने रियासतों के विलय में पटेल का हाथ बंटाया था 

  • हैदराबाद रियासत 82,698 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली थी

  • जिसका क्षेत्रफल ब्रिटेन और स्कॉटलैंड के क्षेत्र से भी अधिक था और आबादी (एक करोड़ 60 लाख) यूरोप के कई देशों से अधिक थी. 
  •  विशेष दर्जे की वजह से ही उसे आज़ादी के बाद भारत में शामिल होने या न होने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था.
  • सेना भेजने पर पटेल और नेहरू में मतभेद
  • शुरू में नेहरू हैदराबाद में सेना भेजने के पक्ष में नहीं थे. पटेल के जीवनीकार राजमोहन गांधी लिखते हैं, ''नेहरू का मानना था कि हैदराबाद में सेना भेजने से कश्मीर में भारतीय सैनिक ऑपरेशन को नुक्सान पहुंचेगा.''
  • उस समय भारत के गृह सचिव रहे एच वीआर आयंगर ने एक इंटरव्यू में कहा था, ''सरदार पटेल का शुरू से ही मानना था कि भारत के दिल में एक ऐसे क्षेत्र हैदराबाद का होना, जिसकी निष्ठा देश की सीमाओं के बाहर हो. भारत की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा ख़तरा था.'
  • एजी नूरानी अपनी किताब 'द डिसट्रक्शन ऑफ़ हैदराबाद' में लिखते हैं, ''हैदराबाद के मुद्दे पर कैबिनेट बैठक बुलाई गई थी जिसमें नेहरू और पटेल दोनों मौजूद थे. नेहरू सैध्दांतिक रूप से सैन्य कार्रवाई के ख़िलाफ़ नहीं थे, लेकिन वो इसे अंतिम विकल्प के तौर पर इस्तेमाल करना चाहते थे. वहीं, पटेल के लिए सैनिक कार्रवाई पहला विकल्प था. बातचीत के लिए उनके पास धैर्य नहीं था.''
  • एच वीआर आयंगर के मुताबिक
  • 13 सितंबर को ही नेहरू ने सरदार पटेल को फ़ोन कर जगाया. 

  • नेहरू ने कहा, ''जनरल बूचर ने मुझे फ़ोन कर इस हमले को रुकवाने का अनुरोध किया है. मुझे क्या करना चाहिए?''

  • पटेल का जवाब था, ''आप सोने जाइए. मैं भी यही करने जा रहा हूँ.' 

हैदराबाद नाम कैसे पड़ा ?
  • 1591 में क़ुतुबशाही वंश में पांचवें, मुहम्मद कुली क़ुतुबशाह ने पुराने गोलकोंडा से कुछ मील दूर मूसा नदी के किनारे हैदराबाद नामक नया नगर बनाया. 
  • हैदरबाद नामंकरण के पीछे प्रसिद्ध धारणा है कि इस शहर को बसाने के बाद मुहम्मद कुली कुतुब शाह एक स्थानीय बंजारा लड़की भागमती से प्रेम कर बैठा। 
  • लड़की से विवाह के बाद लड़की को इस्लाम स्वीकार कराया गया और इस्लामी संस्कृति के अनुसार उसका नया नाम भागमती से बदल कर हैदर महल कर दिया गया 
  •  शहर का भी नया नाम हैदराबाद (अर्थात : "हैदर के नाम पर बसाया गया शहर")
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  • हैदराबाद मुक्ति दिवस  (Hyderabad Liberation Day)
  •  केंद्र ने की सालभर आयोजनों की घोषणा 
  • ​भारत सरकार ने इस उपलक्ष्य में 17 सितंबर 2022 से 17 सितंबर 2023 तक साल भर चलने वाले कार्यक्रमों के आयोजन को मंजूरी दी है।
  • हैदराबाद राज्य की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर केंद्र सरकार सालभर कार्यक्रम आयोजित करेगी। 
  • केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह 17 सितंबर को समारोह का उद्घाटन करेंगे।
  •  रेड्डी ने बताया कि तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर उन्हें हैदराबाद परेड मैदान में आयोजित होने वाले उद्घाटन समारोह में आमंत्रित किया गया है।
  • उन्होंने चिट्ठी में कहा, “मुझे आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि विभिन्न पक्षों पर विचार करने के बाद भारत सरकार ने हैदराबाद राज्य मुक्ति की 75वीं वर्षगांठ मनाने का निर्णय लिया है। 
  • भारत सरकार ने इस उपलक्ष्य में 17 सितंबर 2022 से 17 सितंबर 2023 तक साल भर चलने वाले कार्यक्रमों के आयोजन को मंजूरी दी है।”
  • रेड्डी ने तीनों मुख्यमंत्रियों से यह भी अनुरोध किया कि वे अपने राज्यों में उद्घाटन दिवस मनाने के लिए उचित कार्यक्रम आयोजित करें। 
कर्नाटक और महाराष्ट्र में पहले से मनाया जाता है यह दिवस
  • 2016 .में अमित शाह ने कहा  कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हैदराबाद मुक्ति दिवस के आधिकारिक समारोह का आयोजन क्यों नहीं किया गया।

  • भद्राकाली और रानी रुद्रम्मा देवी की धरा का उल्लेख करते हुए शाह ने तेलंगाना को एक पवित्र स्थान बताया और कहा कि पड़ोसी राज्य कर्नाटक और महाराष्ट्र के कुछ हिस्से पूर्ववर्ती हैदराबाद राज्य में शामिल थे और इन राज्यों में हैदराबाद मुक्ति दिवस मनाया जाता है।

  •  शाह ने वारंगल जिले के हानमकोंडा में  हैदराबाद मुक्ति दिवस के मौके पर उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि हैदराबाद मुक्ति दिवस समारोह एक राष्ट्रीय एजेंडा बन गया है। उन्होंने कहा कि अगर यह समारोह आधिकारिक तौर पर मनाने का फैसला नहीं लिया गया तो श्री राव को मुख्यमंत्री बनाने वाली जनता ही उन्हें सटीक पाठ पढ़ाएगी।

  •  शाह ने कहा कि यह सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों का ही नतीजा था, जो पूर्ववर्ती हैदराबाद राज्य का संघीय भारत में विलय हुआ। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त 1947 को समूचा भारत विदेशी साम्राज्य के चंगुल से आजाद हुआ अौर इसके एक वर्ष बाद ही पूर्ववर्ती हैदराबाद राज्य (वर्तमान में तेलंगाना) को निजाम के शासन से मुक्ति मिली।
हैदराबाद मुक्ति दिवस से ओवैसी को दिक्कत क्या है?

राष्ट्रीय एकता दिवस हो नाम- ओवैसी
  • एआईएमआईएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस कार्यक्रम पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कार्यक्रम को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 17 सितंबर को तेलंगाना में 'हैदराबाद मुक्ति दिवस' मनाने का फैसला किया है। एआईएमआईएम की ओर से, मैंने गृहमंत्री अमित शाह और तेलंगाना के सीएम के चंद्रशेखर राव को पत्र लिखे हैं। मुक्ति के बजाय 'राष्ट्रीय एकता दिवस' कार्यकम के लिए ज्यादा उपर्युक्त हो सकता है।
  • भाजपा ने ‘तेलंगाना मुक्ति दिवस’ मनाने की मांग की
  • भारतीय जनता पार्टी की तेलंगाना इकाई के अध्यक्ष बंडी संजय कुमार ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार को आधिकारिक तौर पर 17 सितंबर को ‘तेलंगाना मुक्ति दिवस’ मनाना चाहिए।
  • गौरतलब है कि 1948 में इसी दिन निजाम के शासन वाले तत्कालीन हैदराबाद राज्य का भारत संघ में विलय हो गया था। लोकसभा सदस्य कुमार ने एक बयान में कहा कि ऑल इंडिया मजलिस-ए- इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के डर से मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव तेलंगाना मुक्ति दिवस नहीं मनाना चाहते। कुमार ने दावा किया कि राव आधिकारिक तौर पर इस दिवस को नहीं मनाकर उनका अपमान कर रहे हैं, जिन्होंने मुक्ति के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा ही एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो इसके लिए लड़ रही है.

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